ओलंपिक स्वर्ण जीत की कहानी, Abhinav की ज़ुबानी

भारत के Abhinav Bindra ने अपने स्वर्ण पदक के साथ पोज़ किया जो उन्होंने बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में जीता था। (Jeff Gross/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)
भारत के Abhinav Bindra ने अपने स्वर्ण पदक के साथ पोज़ किया जो उन्होंने बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में जीता था। (Jeff Gross/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)

एक खिलाड़ी की महानता न केवल असफ़लता से मुक़ाबला करने में होती है बल्कि इस बात में होती है की वह कैसे अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को बरक़रार रखता है। भारत के ओलंपिक इतिहास के सबसे बड़े सितारे Abhinav Bindra के शब्दों में उनके जीवन का सर्वश्रेष्ठ क्षण बहुत ही छोटा था और स्वर्ण जीतने के बाद उन्हें सबसे पहले राहत का एहसास हुआ।

'स्वर्ण मेरा एकमात्र लक्ष्य था'

स्क्वाश खिलाड़ी Saurav Ghosal से एक खास बातचीत में Abhinav Bindra ने बताया की स्वर्ण जीतने का रोमांच बस 2 सेकंड तक रहा और उसके बाद वह भावना राहत में परिवर्तित हो गयी।

'शायद मेरे जीवन में मैंने इतना अच्छा कभी नहीं महसूस किया और उस जीत से मुझे काफी राहत मिली क्योंकि मैंने अपने लक्ष्य को लेकर मैं बहुत ही जुनूनी था,' Abhinav ने 12 साल पुरानी जीत को याद करते हुए कहा।

'मैंने अपने सारे दांव एक ही बाज़ी पर खेले थे और मैं युवा खिलाड़ियों को ऐसा न करने की सलाह दूंगा। मेरे लिए वह स्वर्ण जीतना राहत का मौका था क्योंकि वह मेरे जीवन का एकमात्र लक्ष्य था और मैंने उसे हासिल कर लिया था।'

जब ख़राब हुई Abhinav की राइफल

Bindra ने एक बेहद अहम लम्हे को याद करते हुए बताया की कैसे बीजिंग फाइनल के पहले उनकी राइफल में कुछ तकनीकी खराबी आ गयी थी पर इससे उनका निश्चय और पक्का हो गया।

'फाइनल से 5 मिनट पहले मुझे पता चला की मेरी बन्दूक की 'साईट' को थोड़ा बदला गया है और मैं बिलकुल बौखला गया कुछ क्षणों के लिए। लेकिन अच्छी बात यह थी की मैंने ऐसी आपातकालीन स्थिति के लिए तैयारी की हुई थी,' Bindra ने बताया।

'एक पल के लिए मैं बिलकुल रुक गया और मुझे समझ नहीं आया की मैं क्या करूँ पर हार मान जाना मेरे लिए विकल्प नहीं था। मैंने अपने आप को लड़ने का साहस दिया और अपनी राइफल को ठीक करने के प्रयास में लग गया। उसके बाद मैंने अपने जीवन की सबसे बेहतरीन निशानेबाज़ी करी और वह पदक जीत लिया।'

बीजिंग ओलंपिक्स में स्वर्ण जीतने के बाद भी Abhinav ने अपनी निशानेबाज़ी के अभ्यास में कुछ कमी नहीं आने दी और 2016 में वह पदक से बस एक पॉइंट से चूक गए। शायद 2016 के उनके फाइनल को 2008 से ज़्यादा देखा गया क्यों 130 करोड़ भारतीयों को उनसे पदक की उम्मीद थी।

Abhinav Bindra ने बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता था। (Cameron Spencer/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
Abhinav Bindra ने बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता था। (Cameron Spencer/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2006 Getty Images

जीत के पीछे का मंत्र

विश्व चैंपियनशिप जीत चुके Abhinav Bindra ने कहा की उनका ध्यान पदक पर नहीं बल्कि अपनी सिर्फ तकनीक और निशाने पर था।

'उस क्षण मुझे अपने लक्ष्य के अलावा और कुछ नहीं सोचना था, बस एक एक करके निशाना लगाना था। मुझे उस क्षण की अहमियत पता थी लेकिन फिर भी मैंने आस पास हो रही किसी भी चीज़ पर ध्यान नहीं दिया,' वह बोले।  

Abhinav Bindra के द्वारा बीजिंग खेलों में रचे हुए इतिहास को कोई भी दोहरा नहीं पाया है और वह आज भी भारत के अकेले व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली खिलाड़ी हैं।