जापान की ऐसी अद्भुत भाई बहन की जोड़ी जो टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीतने का प्रयास करेगी 

Abe Uta

ABE Uta का लक्ष्य अपने परिवार के लिए ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीतना और हर मैच को युद्ध समझ कर मैदान में उतरेंगी।

खेल जीवन में हार जीत से ज़्यादा ज़रूरी होता है आगे बढ़ते रहना और ओलिंपिक खेलों से कुछ महीने पहले हम आपको भाई बहन की जोड़ी ABE Uta और ABE Hifumi के बारे में बताएँगे।

जुडो खिलाड़ी ABE Uta की नज़र इस साल जुलाई में होने वाले ओलिंपिक खेलों पर है और उन्हें लगता है कि 25 जुलाई को वह और उनके भाई विश्व स्तर पर चमकेंगे।

Uta और उनके भाई ABE Hifumi ने जुडो को अपना जीवन बना लिया है और अब उन दोनो की नज़र टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों पर है और विलंब के कारण उन्हें अपने कौशल को सुधारने का मौका मिलेगा। उनके भाई को टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में अपनी जगह बनाने में थोड़ा समय लगा लेकिन एक कड़े मुकाबले में Hifumi ने 66 किग्रा वर्ग प्रतियोगिता में अपना स्थान बना लिया।

ABE Uta: भविष्य पर नज़र  

ABE Uta की नज़र इस साल होने वाले ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण पदक पर होगी।

एक ऐतिहासिक और अद्भुत मुकाबला

पिछले साल के अंतिम महीने की 13 तारीक को Uta जुडो के केंद्र कोदोकान में अपने माता पिता के साथ भाई Hifumi को 2019 विश्व चैंपियन MARUYAMA Joshiro का सामना करते हुए देखने के लिए आयी थी। दो बार 66 किग्रा वर्ग में विश्व चैंपियन रह चुके Hifumi को अपने देश के ही Joshiro को हरा कर जापानी टीम में अपना जगह बनानी थी।

Uta ने इस मुकाबले के बारे में बात करते हुए कहा, "ओलिंपिक खेलों में अपना स्थान बनाने के लिए किसी भी खिलाड़ी को ऐसे मुकाबले का सामना नहीं करना पड़ा था इसलिए हम सब थोड़े बेचैन थे। कोरोना महामारी के कारण हमें ज़्यादा बात करने की अनुमति नहीं थी और इस वजह से पूरे प्रतियोगिता स्थल में शांति थी लेकिन मुकाबला बहुत ही रोमांचक था। अंतिम समय तक किसी को पता नहीं था की मुकाबले को कौन जीतेगा और मैच का निर्णय ओवरटाइम में हुआ। मुझे लगा की यह मुकाबला कभी समाप्त नहीं होगा।"

आम तौर पर एक जुडो का मैच चार मिनट में समाप्त हो जाता है लेकिन उस दिन विजेता का निर्णय में 20 मिनट अतिरिक्त लगे और Hifumi ने निरंतर आक्रामक खेल दिखाते हुए Maruyama का संतुलन बिगाड़ दिया जिसके कारण उन्हें मुकाबले का विजेता घोषित किया गया। इस मुकाबले में जीत के सौजन्य से Hifumi ने ओलिंपिक खेलों में अपना स्थान पक्का किया और अबी दोनों भाई बहन स्वर्ण पदक के सपने को वास्तविकता में परिवर्तित करने का प्रयास करेंगे।

"हमें शोर मचाने या चिल्लाने की अनुमति नहीं थी लेकिन जिस क्षण Hifumi को विजेता घोषित किया गया मैं अचानक से चिल्ला पड़ी। मैं बहुत तनावग्रस्त और उत्साहित थी। उस समय मैं एक अभ्यास कैम्प में थी और इसी कारण Hifumi के साथ ज़्यादा समय नहीं बिता पा रही थी। जब मैंने मैच से पिछली रात होटल पर उसे देखा तो मैंने आने वाले मुकाबले के लिए उसका हौसला बढ़ाया। उसने मुझसे उस क्षण कहा की वह तैयार है।"

कोरोना के कारण विलंब

जुडो के 14 वर्गों में से 13 सदस्यों का चयन जापानी टीम के लिए फरवरी 2020 में हो चुका था और उनमें से एक Uta थीं। एक वर्ग के स्थान का चयन नहीं हुआ था और वह था पुरुषों का 66 किग्रा जिसमे उनके भाई और Maruyama प्रबल दावेदार थे। पुरुषों की क्वालीफाइंग प्रतियोगिता अप्रैल में होने वाली थी लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह स्थगित कर दी गयी। अंत में ओलिंपिक खेलों को एक साल के लिए स्थगित कर दिया गया।

"मुझे पता था कि ओलिंपिक खेलों को स्थगित कर दिया जायेगा इसलिए मैं ज़्यादा दुखी नहीं थी। मैं बहुत समय से टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों की तैयारी कर रही थी और तब मुझे इस बात का एहसास हुआ कि सब कुछ दोबारा करना पड़ेगा। मुझे इस बात की ख़ुशी थी कि अभ्यास और तैयारी के लिए एक साल और मिल रहा था।"

Uta जिस विश्वविद्यालय के जुडो केंद्र में अभ्यास करती थी वह कोरोना महामारी के कारण दो महीने के लिए बंद कर दिया गया। इस वजह से वह दो महीने तक खास मैट पर अभ्यास नहीं कर पायी और नियमों के कारण अन्य किसी खिलाड़ी के साथ भी मुकाबला संभव नहीं था। जून के महीने में उन्हें थोड़े से समय के लिए अभ्यास मुकाबले लड़ने का मौका मिला। नियमों के कारण कई खिलाड़ियों को अकेले अभ्यास करना पड़ा लेकिन Uta के साथ उनके भाई Hifumi थे।

उन्होंने बताया, "मैंने अपने भाई के साथ काफी ज़्यादा अभ्यास किया और ऐसा पहली बार हुआ कि हमने इतना समय साथ बिताया। मुझे हारना बिलकुल पसंद नहीं है इसलिए मैं उसे दौड़ में हराने की कोशिश करती थी लेकिन ऐसा कभी नहीं हो पाता था।"

घर में बिताया हुआ समय और Abe परिवार के लिए एक नया लक्ष्य

Uta ने अपने बड़े भाई को हमेशा अपना आदर्श माना और उन्हें पहली बार Hifumi की महानता के बारे में तब पता चला जब दोनों ने एक ही जुडो केंद्र में अभ्यास करना शुरू किया। एक कुशल खिलाड़ी होने के बाद भी Hifumi अभी भी राष्ट्रिय टीम में अपनी जगह नहीं बना पाये थे। यह परिस्थितियां Uta के लिए थोड़ी अलग थी।

"मैंने ओलिंपिक खेलों के बारे में बात नहीं करि क्योंकि तब तक सिर्फ मैं ही क्वालीफाई कर पायी थी। मुझे यह लगा कि हम दोनों अलग व्यक्ति हैं जो अपने लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं। उस समय हम दोनों के लक्ष्य अलग थे। मेरा लक्ष्य था ओलिंपिक खेलों पर स्वर्ण जीतना और मेरे भाई को राष्ट्रिय टीम में अपनी जगह बनानी थी। मुझे पूर्ण विश्वास था की वह मुकाबला जीतेगा।"

दोनों भाई बहन को ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीतते हुए देखना Abe परिवार का सपना है और जब दोनों ने 2018 विश्व चैंपियनशिप में जीत हासिल करि तो उनका आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया। अगले साल आयोजित हुई विश्व चैंपियनशिप में Uta ने जीत हासिल करि लेकिन Hifumi को Maruyama ने पराजित किया और इसी कारण ओलिंपिक खेलों के लिए चयन की दौड़ में वह पीछे हो गए।

"मेरे परिवार के लिए यह आसान नहीं था और हम स्वर्ण पदक जीतने के बारे में साथ बात नहीं कर सकते थे। मेरे माता पिता ने ओलिंपिक खेलों के बारे में बात नहीं करी। जब मेरे भाई ने ओलिंपिक खेलों में अपनी जगह पक्की कर ली तो पूरे परिवार ने राहत की सांस ली। क्वालीफाई करने के अगले दिन हम सब ने साथ खाना खाया और हमारा नज़र अब ओलिंपिक खेलों पर थी।"

अपने कौशल को सुधारना और खेल स्तर को बढ़ाना

ओलिंपिक खेलों के स्थगित होने के बाद Uta ने कड़ा अभ्यास किया और अपने खेल को सुधारने का निश्चय कर लिया। उन्होंने वह पैंतरे सीखने की कोशिश करि जो उनके लिए काफी कठिन थे और जिनके कारण उनका खेल थोड़ा कमज़ोर हो जाता था। इप्पोन से जीतना और आक्रामक रहना उनका स्वाभाविक खेल है लेकिन इसके कारण उन्हें कुछ प्रतिद्वंदियों के विरुद्ध कठिनाई होती है। ऐसे क्षणों में उन्होंने अपने भाई से प्रेरणा ली और Hifumi के Maruyama के विरुद्ध संघर्षपूर्ण खेल का करीब से विश्लेषण किया।

"हर एक खिलाड़ी अपने खेल के बारे में अनुसंधान करता है और मेरे लिए ज़रूरी है कि कठिन परिस्थितियों में मुझे जवाब मिले। मेरा और मेरे भाई का खेलने का तरीका एक जैसा और सुतेमी-वज़ा पैंतरा हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। मैं चाहती हूँ की उसका मुकाबला करते हुए मैं अपने प्रतिद्वंदी को परास्त करूँ।"

कोरोना महामारी के कारण खेल में आये विलंब के कारण विश्व में जुडो प्रतियोगिताएं विलंबित कर दी गयी थी लेकिन जनवरी में Uta दोहा मास्टर्स में खेलेंगी और फरवरी 2020 में आयोजित हुई डुसेलडॉर्फ ग्रैंड स्लैम के बाद यह उनकी जुडो मैट पर वापसी होगी।

**टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों के लिए साथ बढ़ते हुए

**

लगभग एक साल बाद प्रतियोगिता में भाग लेने के Uta बहुत उत्सुक हैं और उन्हें अपने कौशल पर पूरा विश्वास है। उन्हें इस बात की भी ख़ुशी है कि उनके भाई भी इस प्रतियोगिता में भाग लेंगे। खेल जगत में इस भाई बहन की जोड़ी काफी लोकप्रिय है। कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन और इस परिस्थिति के द्वारा उत्पन्न हुई चुनौतियों ने कई लोगों को परिवार का महत्त्व पता चला है।

"एक समय ऐसा था जब मैं यह नहीं कह सकती थी कि हम साथ में स्वर्ण जीतेंगे लेकिन अब कह सकती हूँ। अब मुझे कोई संदेह नहीं है। हम दोनों एक दुसरे का समर्थन करते हैं लेकिन कभी सामने कहते नहीं। मैं अपने बड़े भाई के बिना यह सब हासिल नहीं कर पाती। अगर वह नहीं होता तो शायद मैं कभी जुडो नहीं खेलती।"

परिस्थितियों में ज़्यादा सुधार नहीं आया है लेकिन Uta टोक्यो 2020 के लिए काफी उत्साहित हैं और अपने भाई के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने की प्रतीक्षा कर रही हैं। संजोग से दोनों का मुकाबला 25 जुलाई को होगा।

"मैं अपनी पूरी जान लगा दूंगा और हर मैच में सर्वोच्च प्रदर्शन देने का प्रयास करूँगा। मैं आशा करता हूँ कि जो भी दर्शक मुझे देखे उसे जुडो खेल पसंद आये और मेरी आक्रामक शैली उन्हें अच्छी लगे। वह दिन मेरे और मेरे भाई के लिए बहुत खास होगा और मैं शानदार प्रदर्शन दिखने के लिए तैयार हूँ।"

Uta और उनके भाई Hifumi ओलिंपिक स्वर्ण जीतने का प्रयास करेंगे और इस प्रयास को केवल उनका परिवार ही नहीं बल्कि पूरा जापान देखेगा।

भविष्य पर नज़र

ABE Uta की नज़र इस साल होने वाले ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण पदक पर होगी.